अध्याय 46

समर की नज़र से

सुबह छह बजे अलार्म बजा, मगर मैं तो साढ़े चार से ही जाग रही थी—अँधेरे में फोन को घूरते हुए। कोई मैसेज नहीं। कोई मिस्ड कॉल नहीं। कीरन की तरफ़ से कुछ भी नहीं—हालाँकि मुझे उम्मीद भी नहीं थी, कल कॉरिडोर में जिस तरह उसने मुझे ऐसे आर-पार देखा था जैसे मैं कोई अनजान राहगीर हूँ। उसकी आँखें...

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